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Showing posts from January, 2018

Sardiwale raat!!

               आज रात को देखा सिसकते हुऐ !!          ठण्ड कुछ इस तरह कहर ढा रही थी !!          जैसे वो रात  से बदला ले रही हो किसी बात का ??          डर के मारे चाँन्द और तारे भी ना  जाने कहाँ छुप गाये !!!                    रात को यु थरांना उस बेबाक रात का चुप चाप सब कुछ सहना !!!!           और ठण्ड को दखो ऐसे इतरा रहा है -ठण्ड गुस्सा है किसी बात से -ना जाने क्या बात है !!!!                क्या ये रात का प्यार है, जो बिना कुछ बोले सब सह रहा है !!          इन हवाओ को दखो कैसे झूम -झूम कर साथ निभा रहे है !!!                रात अकेले सब सह रही है -बिना कुछ कहे बाँहे फैला कर बुला रही हो ठण्ड को!!!!!! kaushalkmr29@hotmail.com Sardi...